Christianity is weak because they don't accept Darwin's theory
See, their logic is how they use the parameter to measure the weakness of the world's largest religious group.
Such nonsense targeted defamatory Facebook posts against Christianity by so-called Adivasi, who follow no logic at all. Just love to keep and spread hate.
डार्विन के सिद्धांत से मसीहीयत के कमजोर होने से कोई लेना देना नहीं साबित होता है| तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि इस तरह के सोशल पोस्ट एक खास तरह का पोलिटिकल एजेंडा है, मूलतः ये दो पार्टियों को आपस में लड़ा कर फायदा बटोरना होता है| आप देख सकते हैं, कि किस तरह से सारी बातें कुतर्क से भरी पड़ी हैं|
Christianity Is So Weak That It Cannot Accept New Truths
ईसाई धर्म कमजोर है कि नया सक स्वीकार ही नहीं कर सकता|
आप हंस सकते हैं कि मसीहीयत की कमजोरी नापी गई है नए सच को न स्वीकार करने पर जो कि डार्विन के सिद्धांत पर आधारित है|
नया सच, जो कि होता ही नहीं | Truth is unique.
सच सिर्फ सच होता है, जो कि पहले भी वही था जो अब है। सच अगर बदल जाए तो उस पर हम काम कैसे करेंगे? क्या कोई चोर या झूठा, अपने आप को सही साबित नहीं कर देगा, नए सच के आ जाने से?
भई, नया ज्ञान बोल जाना चाहिए, न कि नया सच| तो आप देख सकते हैं, कैसे शब्दों से खेल गया है ताकि emmotion को divert किया जा सके|
डार्विन का सिद्धांत भी अजीब कल्पना पर आधारित है जिसका कोई तथ्य नहीं|
और लोग नापते हैं मसीहीयत के ताकतवर या काजोर होने को। अजीब तमाशा है?|
डार्विन के सिद्धांत को सत्यापित ही नहीं किया गया है और संभव ही नहीं |
जिन सबूतों की बात की जाती हैं वो आधी अधूरी जानकारी है जिससे कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता | टूटी हुई कड़ियाँ हैं, जो कोई तथ्य पेश नहीं करती|
Observation is important.
बिना observation के आप किसी कल्पना को तथ्य नहीं कह सकते हैं |

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